"मचान" ख्वाबो और खयालों का ठौर ठिकाना..................© सर्वाधिकार सुरक्षित 2010-2013....कुमार संतोष

बुधवार, 11 मई 2011

ख़ामोशी की भी एक ज़ुबां होती है

ख़ामोशी  की  भी एक ज़ुबां  होती  है
आँखों में भी अनकही दास्ताँ होती है

बिना  लफ़्ज़ों  के  सुने  कोई  दिल की ज़ुबां
मगर जिंदगी कब हर वक़्त मेहरबाँ होती है 

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यादों से आज  मेरी मुलाक़ात हो गई
जो बात तेरी निकली तो रात हो गई

तुझसे जुदाई वाले जो पल मुझे मिले

आसमां भी रो पड़ा और बरसात हो गई

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (12-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  2. बहुत बहुत शुक्रिया वंदना जी !
    हार्दिक अभिनंदन !

    उत्तर देंहटाएं
  3. कितने गहरे भाव छुपा रखे है आपने बस कुछ पंक्तियों में...बहुत सुंदर...धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  4. ऐसी भी बरसातें हुआ करती हैं ...
    सुन्दर !

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  5. बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ.... वाह..

    उत्तर देंहटाएं
  6. यादों से आज मेरी मुलाक़ात हो गई
    जो बात तेरी निकली तो रात हो गई ...

    क्या बात है .. उनके ख्याल आए तो आते चले गये ....
    सच है उनकी यादें ऐसी ही होती हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्रिय बंधुवर संतोष कुमार जी
    सादर अभिवादन !

    यादों से आज मेरी मुलाक़ात हो गई
    जो बात तेरी निकली तो रात हो गई
    तुझसे जुदाई वाले जो पल मुझे मिले
    आसमां भी रो पड़ा और बरसात हो गई


    क्या बात है जनाब ! बहुत ख़ूब कहते हैं आप !

    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  8. संजय जी, राजेंद्र जी बहुत बहुत शुक्रिया !!

    उत्तर देंहटाएं
  9. तुझसे जुदाई वाले जो पल मुझे मिले
    आसमां भी रो पड़ा और बरसात हो गई

    क्या बात है. बहुत ख़ूब.

    उत्तर देंहटाएं

आपकी प्रतिक्रिया बहुमूल्य है !

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