"मचान" ख्वाबो और खयालों का ठौर ठिकाना..................© सर्वाधिकार सुरक्षित 2010-2013....कुमार संतोष

गुरुवार, 5 मई 2011

उस मौसम की हर एक बरसातें याद हैं

वो  बातें  याद हैं,  वो सारी  रातें याद  हैं
मुझे  अब तक सारी  मुलाकातें याद  हैं


भिगोया  था जब मैंने तुमको सफ़र मैं
उस मौसम की हर एक बरसातें याद हैं


वो  खुशबू  भरे  ख़त गुलाबों में लिपटे
जो  भिजवाए  थे सारी सौगातें याद हैं


वो इश्क की बातें, मोहब्बत के किस्से
दुनियाँ की रश्में, वो सवालातें याद हैं


बेहतर है भुला दूँ  जो जीना है मुझको
मगर  कैसे  भुला  दूँ  जो बातें याद हैं

7 टिप्‍पणियां:

  1. चुपके -चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है "

    यादे दिल से भुलाई नही जाती ..सुंदर काव्य -रचना

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  2. बेहतर है भुला दूँ जो जीना है मुझको
    मगर कैसे भुला दूँ जो बातें याद हैं
    Hmmmmm....kuchh baaten bhulaye nahee bhoolteen!

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  3. बेहतर है भुला दूँ जो जीना है मुझको
    मगर कैसे भुला दूँ जो बातें याद हैं

    बहुत खूब.

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  4. दर्शन कौर जी, क्षमा जी, विशाल जी बहुत बहुत शुक्रिया !!

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  5. बहुत गहरे भाव भर दिए आपने इन चंद शब्दों में ...आपका आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका
    बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

    उत्तर देंहटाएं

आपकी प्रतिक्रिया बहुमूल्य है !

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