"मचान" ख्वाबो और खयालों का ठौर ठिकाना..................© सर्वाधिकार सुरक्षित 2010-2013....कुमार संतोष

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

नींद बहुत कम है आज कल

नींद बहुत कम है आज कल
जाने क्या गम है आज कल

दिल भरा-भरा सा रहता है

आँखे भी नम है आज कल

तू नहीं है जिंदगी में मेरी
सिर्फ तेरा भरम है आज कल


भूलने को शराब है लेकिन
मुझे तेरी कसम है आज कल

तनहाइयों से दोस्ती हो गई
महफिलों का सितम है आज कल

5 टिप्‍पणियां:

  1. तनहाइयों से दोस्ती हो गई
    महफिलों का सितम है आज कल

    बहुत खूब ..सुन्दर

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  2. बहुत बहुत शुक्रिया संगीता जी...

    आभार !!

    उत्तर देंहटाएं
  3. अच्छी नज्म है --बहुत खूब सुरती से पिरोई हुई है माला की तरह --

    तू नहीं है जिंदगी में मेरी
    सिर्फ तेरा भरम है आज कल

    भूलने को शराब है लेकिन
    मुझे तेरी कसम है आज कल

    उत्तर देंहटाएं
  4. sir apki tarah hi apki is shayari ka bhi koi jawab nahi h bohat hi achi lines h.

    उत्तर देंहटाएं

आपकी प्रतिक्रिया बहुमूल्य है !

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