"मचान" ख्वाबो और खयालों का ठौर ठिकाना..................© सर्वाधिकार सुरक्षित 2010-2013....कुमार संतोष

बुधवार, 6 जुलाई 2011

दर्द जब हद से गुजर जाये तो हँस देता हूँ

दर्द  जब हद  से गुजर जाये तो हँस देता हूँ
गम जब दिल में उतर जाये तो हँस देता हूँ

अब तो महफ़िल में डसती है तन्हाई मुझको
कोई मुझसा मुझे मिल जाये तो हँस देता हूँ

जिंदगी  का  मैं  सताया  हूँ  मुझे  गर   कोई
ये  कहता  है  तू  मर  जाये  तो  हँस देता हूँ

वक़्त  के  राज़  छुपाये  हैं  कई इस दिल में
राज़ जब आँख से बह  जाये तो हँस देता हूँ

तास के पत्तों का बनता हूँ मकां रफ्ता रफ्ता 
शक की आंधी में बिखर जाये तो हँस देता हूँ
  

4 टिप्‍पणियां:

  1. अब तो महफ़िल में डसती है तन्हाई मुझको
    कोई मुझसा मुझे मिल जाये तो हँस देता हूँ
    Behad sundar panktiyan!

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  2. दर्द से भरा इन्सां बखूबी दर्द समझता है..पर अपना दर्द अपना ही होता है...
    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ...
    बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर
    मेरी हार्दिक शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बहुत शुक्रिया संगीता स्वरूप जी, कविता जी और kshama जी !

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