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गुरुवार, 12 जनवरी 2012
शनिवार, 24 दिसंबर 2011
अनमने से ख़याल
कुछ अनसुलझे, अनमने से ख़याल यूँ ही ज़हन में बरस जाते हैं...और दस्तक दे जाते हैं उन सोई हुई, डरी सी, सहमी हुई यादों को जिन्हें फिर से जीना एक युग गुजर जाने के समान है !
आज भी मैं उन पगडंडियों पर से रोज़ गुजरता हूँ, जहाँ बरसो पहले तुम्हारे पांव में कांटा चुभा था !
अब वो कांटा मेरे पांव में रोज़ चुभता है..... ये चुभन ही मेरे दर्द को सकूं पहुचाते हैं.......!
जिंदगी तुझसे तो कुछ गिला नहीं,
जिसे दिल से चाहा बस वो मिला नहीं,
यूँ तो हज़ारो लोग जिंदगी में मिले,
कोई दिल से न मिला, किसी से दिल मिला नहीं !
भुलना मुशकिल है उसे जो मुझे भुला गया,
हो के मुझसे दूर जो मुझको रूला गया,
ख़ुदा करे वो ख़ुश रहे जहां भी रहे,
कोई तो सूने दिल में कलियाँ खिला गया !
मंगलवार, 22 नवंबर 2011
शनिवार, 30 जुलाई 2011
मैं शायर हूँ, मुझे पत्थर दिल ना समझ लेना
"ज़ख्म ख़ामोश हैं जो हमने खाऐ थे ज़माने से
मैं शायर हूँ, मुझे पत्थर दिल ना समझ लेना
कोई भी टूट सकता है इतना आज़माने से..."
उसे हर पल कुरेदा ज़िन्दगी ने सौ बहाने से
मैं शायर हूँ, मुझे पत्थर दिल ना समझ लेना
कोई भी टूट सकता है इतना आज़माने से..."
बुधवार, 11 मई 2011
ख़ामोशी की भी एक ज़ुबां होती है
ख़ामोशी की भी एक ज़ुबां होती है
आँखों में भी अनकही दास्ताँ होती हैबिना लफ़्ज़ों के सुने कोई दिल की ज़ुबां
मगर जिंदगी कब हर वक़्त मेहरबाँ होती है
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यादों से आज मेरी मुलाक़ात हो गईजो बात तेरी निकली तो रात हो गई
तुझसे जुदाई वाले जो पल मुझे मिले
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यादों से आज मेरी मुलाक़ात हो गई
तुझसे जुदाई वाले जो पल मुझे मिले
आसमां भी रो पड़ा और बरसात हो गई
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