"मचान" ख्वाबो और खयालों का ठौर ठिकाना..................© सर्वाधिकार सुरक्षित 2010-2013....कुमार संतोष

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

दिल भी सूना सूना है

दुनियाँ  है  अंजानी  सी  और रास्ता  भी  अंजाना सा
तुम होते जो पास तो लगता कुछ जाना पहचाना सा

दूर  गए  हो  तुम  तो  जब  से  दिल भी सूना सूना है
आँगन  सूना  घर  भी   सूना  जैसे  एक  वीराना  सा

दिल की बातें दिल ही जाने मुझको इतना  मालूम है
तेरी  गलियों  में  फिरता  है  जैसे  एक   दीवाना  सा

जैसा  हूँ  में खुश  रहता हूँ  सबसे जब में ये कहता हूँ
सब  कहते  हैं  मुझको  लगता  ये तो एक बहाना सा

7 टिप्‍पणियां:

  1. जैसा हूँ में खुश रहता हूँ सबसे जब में ये कहता हूँ
    सब कहते हैं मुझको लगता ये तो एक बहाना सा.... bhaut acchi panktiya....

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  2. बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने ! आपकी लेखनी को सलाम!

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  3. जैसा हूँ में खुश रहता हूँ सबसे जब में ये कहता हूँ
    सब कहते हैं मुझको लगता ये तो एक बहाना सा
    very well said..
    i like it..

    उत्तर देंहटाएं

आपकी प्रतिक्रिया बहुमूल्य है !

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