"मचान" ख्वाबो और खयालों का ठौर ठिकाना..................© सर्वाधिकार सुरक्षित 2010-2013....कुमार संतोष

गुरुवार, 2 सितंबर 2010

मित्र जो ढूंडन मैं चला

मित्र  जो  ढूंडन  मैं  चला  ढूँढा सकल जहाँन
फेसबुक किया सर्च तो मिल गए कल्लू राम
मिल गए  कल्लू राम स्क्रैप हमने कर डाला
यहाँ   छुपे  बैठे  हो  कर   के  तुम   घोटाला
लूटा   हमसे    जितने  रूपए  हमें   लौटाओ
नहीं    करोगे   ऐसा  कसम  हमारी   खाओ
इंटरपोल    पड़ी   पीछे    तो   होंगे   फड्डे
कपडे  लत्ते    संग   बिकेंगे    तुम्हारे चड्डे

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