"मचान" ख्वाबो और खयालों का ठौर ठिकाना..................© सर्वाधिकार सुरक्षित 2010-2013....कुमार संतोष

बुधवार, 1 सितंबर 2010

मैं तेरी मोहब्बत का इलज़ाम लिए फिरता हूँ

मैं  तेरी  मोहब्बत  का  इलज़ाम  लिए  फिरता हूँ
जिस शहर से भी गुजरूँ तेरा नाम लिए फिरता हूँ


तेरा  जाना  मेरे  दिल   को  हर  लम्हा  रुलाता है
अश्क छुपाने की कोशिस नाकाम लिए फिरता हूँ  
            
दरबे  पर  मुझसे  मिलने  तेरा  नंगे  पाँव  आना 
अब तक एहसासों की मैं वो शाम लिए फिरता हूँ  


अच्छा है  भूल  जाऊं  किस्मत  मैं  जब नहीं तू
तुझको भूलने के खातिर मैं जाम लिए फिरता हूँ


जीना  भी  क्या है जीना बिन  तेरे भला मुझको 
मैं  अपने  न  होने  का  पैगाम  लिए  फिरता हूँ 

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