"मचान" ख्वाबो और खयालों का ठौर ठिकाना..................© सर्वाधिकार सुरक्षित 2010-2013....कुमार संतोष

बुधवार, 15 सितंबर 2010

छक्के पे छक्का

लाली लगा होंटों पे,   करके   सुनहरे   बाल
सफ़ेद साड़ी पहिनकर,  बिंदी  लगाईं  लाल
बिंदी लगाईं लाल, पिया ज़रा   देखो हमको
इस गेटप को पहनकर कैसी लगती तुमको
हम बोले श्री मति जी तुम लग रही हो ऐसे
एम्बुलेंस चला आ रहा  हास्पिटल का जैसे






प्यार व्यार सब छोड़ कर, करो कविता पाठ
कविता से गुण बढ़त हैं, खड़ी प्यार की खाट
खड़ी प्यार की खाट  सुन लो मिस्टर भल्ला
पकडे  गए  तो  हो  जाओ बदनाम मोहल्ला
कविता की  मस्ती  में  सबकुछ पा जाओगे
खा कर प्यार में धोका एक दिन पछताओगे

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया लिखा है..मजा आ गया पढ़कर

    http://veenakesur.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी पंक्तिया ........
    अच्छी कविता ........

    मेरे ब्लॉग कि संभवतया अंतिम पोस्ट, अपनी राय जरुर दे :-
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_15.html
    कृपया विजेट पोल में अपनी राय अवश्य दे ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. @ वीणा जी बहुत बहुत धन्यवाद आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया का !

    @ गजेन्द्र जी आपके ब्लॉग पर मैंने पहले ही अपनी राय दे दी थी ! आपका मेरे ब्लॉग पर आने का बहुत बहुत धन्वाद !

    उत्तर देंहटाएं

आपकी प्रतिक्रिया बहुमूल्य है !

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