"मचान" ख्वाबो और खयालों का ठौर ठिकाना..................© सर्वाधिकार सुरक्षित 2010-2013....कुमार संतोष

सोमवार, 13 सितंबर 2010

चाँद तुम्हारे छत पर उतरा था

कल रात
मैंने खिड़की से देखा
चाँद तुम्हारे छत पर उतरा था
कुछ तो बातें कि होगी तुमसे
यूँ ही नहीं वो गया होगा 

उस वक़्त
जब तूम विदा करने आई थी
चाँद को
गलियारे में
मैंने पहचाना नहीं
दोनों में से तुम कौन हो

और आज सुबह
जब तुम मंदिर में खड़ी थी
आँखे मूंदे
मैंने चुपचाप देखा था तुम्हे
सीढियों से
तुम्हारी बिंदिया
अरे
वो चाँद याद आ गया फिर से मुझे

आज अमावस है
जानता हूँ
आसमान में नहीं निकलेगा चाँद आज
मगर तुम छत पर जरूर आओगी
मुझे क्या
मुझे तो अपने चाँद से मतलब है  

3 टिप्‍पणियां:

  1. अति सुन्दर !!! हर पंक्ति बहुत कुछ कहती हुई !!!

    अथाह...

    धन्यवाद !!!

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  2. उस वक़्त
    जब तूम विदा करने आई थी
    चाँद को
    गलियारे में
    मैंने पहचाना नहीं
    दोनों में से तुम कौन हो..............ek ek shabd mei pyar kaa aabhas.......bahut khub

    उत्तर देंहटाएं

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